जानिए अजीबोगरीब टैक्स के बारे में, दाढ़ी, यूरीन, टोपी, नमक, सेक्स, दुनिया के बेतुके टैक्स

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जानिए दुनिया के अजीबोगरीब टैक्स के बारे में, वित्त मंत्री 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगी।

इसमें टैक्सपेयर्स को राहत की उम्मीद की जा रही है। उधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश में इनकम टैक्स व्यवस्था को खत्म करने की वकालत भी की है। वह दूसरे देशों पर टैरिफ लगाकर अपना खजाना भी भरना चाहते हैं।

बजट के इस मौसम में हम आपको कई ऐसे टैक्स के बारे में बता रहे हैं जिनकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती।

और जिन घरों में 10 से अधिक खिड़कियां होती थीं उन्हें दस शिलिंग टैक्स देना पड़ता था। इससे बचने के लिए कई लोगों ने अपनी खिड़कियों को ईंटों से कवर कर दिया था।

लेकिन इससे उनका स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा। आखिर 156 साल बाद 1851 में जाकर यह टैक्स पूरी तरह से खत्म हुआ।

और यह टैक्स आदमी की सामाजिक हैसियत के हिसाब से लिया जाता था। हेनरी अष्टम के बाद उनकी बेटी एलिजाबेथ प्रथम ने नियम बनाया कि दो हफ्ते से ज्यादा बड़ी दाढ़ी पर टैक्स लिया जाएगा।

मजेदार बात यह है कि अगर टैक्स वसूली के वक्त कोई घर से गायब मिले तो उसका टैक्स पड़ोसी को देना होता था। और 1698 में रूस के शासक पीटर द ग्रेट ने भी दाढ़ी पर टैक्स लगाया था।

दाढ़ी बढ़ाने पर टैक्स देना पड़ता था। वह रूस के समाज को यूरोपीय देशों की तरह आधुनिक बनाना चाहते थे।

इसके अलावा यह टैक्स उन लोगों को देना पड़ता था जो आत्मा जैसी कोई चीजों पर यकीन करते थे। जो आत्मा में यकीन नहीं रखते थे, उनसे भी टैक्स लिया जाता था। उनसे धर्म में आस्था न रखने का टैक्स लिया जाता था।

यानी सभी को टैक्स देना होता था। कहा जाता है कि चर्च और रसूखदार लोगों को छोड़कर सबको यह टैक्स देना होता था। इसमें भी टैक्स वसूली के समय टैक्सपेयर घर से गायब हो तो पड़ोसी को देना होता था।

और जर्मनी में प्रॉस्टिट्यूशन लीगल है, लेकिन इसके लिए यहां सेक्स टैक्स जैसे कानून बनाए गए हैं। बॉन में प्रॉस्टिट्यूट को हर दिन के काम के लिए 6 यूरो चुकाने पड़ते हैं। सेक्स टैक्स देश को सालाना 10 लाख यूरो वार्षिक की कमाई होती है।

इसके अलावा रोम के राजा वेस्पेशन ने पब्लिक यूरिनल से यूरीन के डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स की व्यवस्था की थी। जब उनके बेटे टाइटस ने इस पॉलिसी पर सवाल उठाया तो वेस्पेशन ने उसकी नाक पर एक सिक्का लगा दिया और उससे कहा, ‘Money doesn’t stink यानी पैसों से दुर्गंध नहीं आती।’

और सभी हैट के अंदर लाइनिंग पर एक स्टांप लगा होता था। सरकार के इसे पूरी गंभीरता के साथ लागू किया था। इस नियम को नहीं मानने वालों और स्टांप के साथ छेड़छाड़ करने वालों के लिए मौत की सजा थी।

इस टैक्स को 1811 में खत्म कर दिया गया। इसी तरह इंग्लैंड में विग पाउडर पर भी टैक्स लगाया गया था। इसे 17वीं शताब्दी में लगाया गया था। फ्रांस के साथ लड़ाई के कारण इंग्लैंड की हालत खस्ता हो गई थी और सरकार खजाने को भरने के लिए यह टैक्स लगाया गया था।

न्यूजीलैंड में ग्रीनहाउस गैस की समस्या में पशुओं के डकार का सबसे ज्यादा योगदान भी है। रिसर्च के मुताबिक मवेशियों की डकार से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है।

किसानों को 2025 से अपने मवेशियों की डकार पर टैक्स भी देना होगा। इस योजना के जरिये वसूले गए टैक्स को किसानों के लिए रिसर्च, विकास और सलाहकार सेवाओं में लगाया जाएगा।

और भारत में भी अंग्रेजों ने नमक पर टैक्स लगाया था। 187 साल तक देश में नमक की सप्लाई पर अंग्रेजों का कंट्रोल रहा। सबसे पहले 1759 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने नमक पर टैक्स लगाया।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1930 में नमक पर टैक्स के खिलाफ दांडी मार्च निकाला था। लेकिन इसके बावजूद यह टैक्स बना रहा। अक्टूबर 1946 में अंतरिम सरकार ने इस टैक्स को पूरी तरह से समाप्त किया था।

इसके अतिरिक्त निचली जाति की महिलाओं के स्तन ढकने पर टैक्स लगाया था। इनमें एजवा, थिया, नाडर और दलित समुदाय की महिलाएं शामिल थीं। इन महिलाओं को अपने स्तन ढकने की इजाजत बिल्कुल भी नहीं थी।

ऐसा करने पर उन्हें भारी टैक्स देना पड़ता था। आखिरकार नांगेली नाम की एक महिला के कारण त्रावणकोर की महिलाओं को इस टैक्स से मुक्ति मिली। नांगेली ने यह टैक्स देने से मना कर दिया।

जब एक टैक्स इंस्पेक्टर उसके घर पहुंचा तो नांगेली ने टैक्स देने से इनकार कर दिया। इस टैक्स के विरोध में उसने अपने स्तन काट दिए। ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौत हो गई और इसके साथ ही राजा को यह टैक्स खत्म करने के लिए फिर मजबूर होना पड़ा।

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