न्यूज़लिंक हिंदी, मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण को लेकर सुनवाई की अब कोर्ट ने सर्वे करने की भी मंजूरी दे दी है। एक तरफ हिंदू पक्ष की याचिका को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ ईदगाह कमेटी और वक्फ बोर्ड की दलीलों को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
इससे पहले हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने पक्षों को सुनने के बाद 16 नवंबर को आदेश सुरक्षित रख लिया था।
#WATCH | On Krishna Janmabhoomi case, Vishnu Shankar Jain, the lawyer for the Hindu side says, "Allahabad HC has allowed our application where we had demanded survey of (Shahi Idgah Masjid) by advocate commissioner. The modalities will be decided on Dec 18. The court has rejected… pic.twitter.com/OLSeYYSe50
— ANI (@ANI) December 14, 2023
इस मामले में हाईकोर्ट ने 16 नवंबर को हुई सुनवाई के बाद सभी 18 केसों से संबंधित वादकारी और प्रतिवादियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया था। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया था कि सेशन कोर्ट में दाखिल 18 वादों की फाइलों को हाईकोर्ट ने अपने अधीन सुनवाई के लिए ले रखा है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था- कि ईदगाह पक्ष जन्मभूमि की स्थापत्य कला के साथ खिलवाड़ कर सबूतों को नष्ट कर रहा है। इससे पहले ही साक्ष्य नष्ट कर दिए जाएं, हाईकोर्ट से मांग की जाएगी कि ज्ञानवापी की तर्ज पर जन्मभूमि का भी सर्वे कराने का आदेश देने की कोर्ट से अपील की जाएगी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह का इतिहास
ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी जगह 1669-70 में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था। 1770 में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। इसमें मराठा की जीत हुई थी। जीत के बाद मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया।
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1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13.37 एकड़ की भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी। 1951 में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ये भूमि अधिग्रहीत कर ली।

