न्यूज़लिंक हिंदी। प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के मुख्यालय के मंच से जिन चार नई जातियों का जिक्र किया है, उसे लेकर अब सियासत में नए जातीय समीकरण तलाशे जाने लगे हैं। सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही हैं कि बिहार में जातिगत जनगणना के आधार पर लिए गए बड़े फैसले और अखिलेश यादव के पीडीए जैसे फॉर्मूले पर बिसात बिछाने वाली लोकसभा की सियासत में मोदी की ये चार जातियां क्या बड़ा गुल खिलाएंगी।
फिलहाल भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “गरीब, युवा, महिला और किसान” जातियों को साधने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से इन चार वर्गों को साधने की तैयारी की है, इससे न सिर्फ जातीयता के समीकरण सधेंगे, बल्कि इन वर्गों के लोगों को जोड़ने का यह बड़ा फॉर्मूला भी सेट किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषक एस प्रभाकर कहते हैं कि भाजपा ने जिस तरीके से चार वर्गों को अपने नजरिए से आगे कर सियासत बढ़ाई है, वह राजनीति में एक तरह से बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है। उनका कहना है कि जिन चार वर्गों का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जातियों के तौर पर उल्लेखित करते हुए कहा है, दरअसल उसमें सभी जातियां शामिल है।
उनका कहना है कि दलितों से लेकर आदिवासियों और मुसलमानों से लेकर पिछड़ा समेत सवर्णों तक में युवा, महिला, गरीब और किसान होते हैं। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी का इन चारों वर्गों को टारगेट करते हुए अपने भाषण में जिक्र करना सभी जातियों को शामिल करने वाला सियासी शॉट है।

