दिवाली के दिन उत्तरकाशी में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन टनल का 50 मीटर हिस्सा धंसा, मलबे में दबे 36 मजदूर

दिवाली पर उत्तराखण्ड में एक बड़ा हादसा हो गया। यहां ब्राह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा से डंडालगांव तक नवयुगा कंपनी की निर्माणाधीन टनल के टूटने की सूचना है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। दिवाली पर उत्तराखण्ड में एक बड़ा हादसा हो गया। यहां ब्राह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा से डंडालगांव तक नवयुगा कंपनी की निर्माणाधीन टनल के टूटने की सूचना है। घटना शनिवार देर रात की है। निर्माणाधीन टनल के अंदर दर्जनों मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। सूचना मिलते ही उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से राहत और बचाव दलों को दुर्घटना स्थल के लिए भेजा गया। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

बता दें कि सुरंग का निर्माण एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) के निर्देशन में नवयुगा कंपनी कर रही है। बताया जा रहा है कि सुरंग के अंदर 40 से ज्यादा मजूदर फंसे हैं। जिला आपदा प्रबंधन उत्तरकाशी ने इसकी पुष्टि की है। हांलाकि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि सुरंग के अंदर कुल कितने श्रमिक फंसे हैं। कंपनी की ओर से मलबे को हटाने का कार्य किया जा रहा है। मौके पर पांच 108 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। एडीजी कानून व्यवस्था एपी अंशुमान ने बताया कि अभी किसी की मृत्यु की सूचना नहीं है। एसडीआरएफ और अन्य बचाव दल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए है।

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जानकारी के अनुसार, हादसा रविवार सुबह 5:00 बजे हुआ। सिलक्यारा की ओर सुरंग के द्वार से 200 मीटर की दूरी पर यह भूस्खलन हुआ है, जबकि जो मजदूर काम कर रहे थे वो वाहन द्वार के 2800 मीटर अंदर हैं। आलवेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत तैयार की जा रही सुरंग की लंबाई 4.5 किमी है। इसमें से चार किमी तक निर्माण पूरा कर लिया गया है। पहले सुरंग निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य सितंबर 2023 था, लेकिन अब मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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उत्तराखंड के चमोली जिले में भी 2021 में टनल में मजदूर फंस गए थे। तपोवन सुरंग में मजदूर फंसे थे। सुरंग से मलबा साफ करने को जेसीबी के साथ डम्पर भी लगाए गए थे, लेकिन कई दिनों की मशक्कत के बाद भी जिला प्रशासन को कोई सफलता हाथ नहीं लगी थाी। टनल में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नई मशीनों के साथ ड्रिल का प्रयास किया गया था। जिला प्रशासन की ओर से कई दिनों तक राहत व बचाव कार्य किया गया था। टनल में फंसे होने की वजह से 53 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

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