देशभर के व्यापारियों और उद्योगों के लिए अब राहत भरे एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यापारी वास्तविक रूप से माल खरीदता है।
तो फिर उसका भुगतान बैंकिंग माध्यम से करता है और सभी वैध जीएसटी दस्तावेज उपलब्ध हैं।
तो केवल इस आधार पर उसकी इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं रोकी जा सकती कि संबंधित सप्लायर का जीएसटी पंजीकरण बाद में रद हो गया।
और सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 एवं अन्य बनाम मेसर्स सेफकान लाइफ साइंस के मामले में ही 17 जुलाई 2026 को विभाग की विशेष अनुमति याचिका पूर्ण खारिज कर दी जिसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला प्रभावी भी हो गया।
साथ ही जीएसटी विभाग ने सेफकान लाइफसाइंस प्राइवेट लिमिटेड की ही आइटीसी इस आधार पर अस्वीकार कर दी थी कि जिस यूनीमैक्स फार्मा केम से माल खरीदा गया था।
और फिर उसका जीएसटी पंजीकरण बाद में निरस्त भी कर दिया गया। फिर विभाग ने सप्लायर को फर्जी बताते हुए खरीदार की आइटीसी भी रोक दी थी।
इसके अलावा खरीदार की किसी प्रकार की धोखाधड़ी या मिलीभगत का कोई प्रमाण भी विभाग प्रस्तुत नहीं कर सका। फिर इन तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने करदाता के पक्ष में फैसला भी दिया था।
इसके अलावा कर विशेषज्ञ एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता ने ये भी बताया कि हाई कोर्ट के निर्णय को राज्यकर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
लेकिन शीर्ष अदालत ने ही एसएलपी खारिज कर दी। और फिर इससे यह सिद्धांत और मजबूत हो गया कि केवल सप्लायर का पंजीकरण रद हो जाना।
और फिर खरीदार का आइटीसी अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार भी नहीं है। फिर अब विभाग को आइटीसी अस्वीकार करने के लिए साबित भी करना होगा कि खरीदार भी फर्जी लेन-देन या कर चोरी की साजिश में शामिल था।