डेंगू को अब सिर्फ बारिश के मौसम की बीमारी मानना भारी पड़ सकता है। हालांकि बरेली में इस वर्ष सिर्फ 5 मामले डेंगू के आए हैं।
लेकिन अनदेखी करना भारी पड़ सकता है। फिर एक्सपर्ट की माने तो अनदेखी करने से हर महीने डेंगू का खतरा बना रहता है।
और बरेली में पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि डेंगू का पैटर्न बदल रहा है। फिर वर्ष 2021 में जिले में 595 मरीज मिले थे और नौ मौतें हुई थीं।
2022 में 473 मरीज और पांच मौतें दर्ज हुईं। और 2023 में आंकड़ा अचानक बढ़कर 1,079 पहुंच गया। फिर इसके बाद 2024 में 89 और 2025 में 47 मरीज मिले।
2026 में मई तक चार मरीज सामने आ चुके थे। यानी मामले घटे जरूर हैं, लेकिन बीमारी का खतरा खत्म नहीं हुआ है।
और डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर साफ पानी के छोटे-छोटे जमाव में भी पनप सकता है।
फिर कूलर, गमले, टायर, बाल्टी, छतों पर रखे कंटेनर और पानी की टंकियां इसके लिए पर्याप्त हैं।
फिर यही वजह है कि बारिश रुकने के बाद भी घरों और आसपास जमा पानी में मच्छरों का प्रजनन जारी रह सकता है।
इसके साथ ही डेंगू का पैटर्न अब पूरी तरह बदल गया है। फिर पहले हम इसे सिर्फ मानसून की बीमारी मानते थे, लेकिन अब यह हर मौसम में खतरा बन गया है।
और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है मौसम का बदलना। अब बेमौसम बारिश होती है और सर्दियां भी देर से शुरू होती हैं।
फिर इससे मच्छरों को अंडे देने और पनपने के लिए ज्यादा लंबा समय मिल जाता है। और बारिश भले ही रुक जाए, लेकिन पानी हमारे घरों के आस-पास ही मौजूद भी रहता है।
और छतों पर रखे पुराने टायरों, टूटे बर्तनों, गमलों, AC के पाइप और फ्रिज की ट्रे में पानी हफ्तों तक जमा रहता है। फिर लोगों को खुद भी सतर्क भी होना पड़ेगा।