मई अब खत्म होने को है, लेकिन सूरज की तपिश घटने का नाम ही नहीं ले रही। और फिर पिछले साल इस समय तक मॉनसून ने भारत में धमक दे दी थी।
लेकिन इस बार अभी तक मॉनसून का कोई अता-पता भी नहीं है। फिर शुक्रवार को मौसम विज्ञान विभाग ने मॉनसूनी बारिश के लिए जो भविष्यवाणी की, उसमें सामान्य से कम बारिश की बात भी कही गई। यानि जून, जुलाई में भी हीटवेव की चेतावनी भी दी गई है।
इसके साथ ही IMD ने जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान भारत में मौसमी वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की पूर्ण संभावना है, जिसमें मॉडल त्रुटि 4 प्रतिशत तक भी हो सकती है।
और फिर 2015 के 9 साल बाद IMD ने इस बार सामान्य से कम बारिश की संभावना भी जताई है।
फिर 2015 में अल नीनो के कारण 88 प्रतिशत बारिश की संभावना भी जताई गई थी। लेकिन हकीकत में 86 प्रतिशत बारिश हुई थी।
फिर अब इस साल मौसम विभाग ने 90 प्रतिशत बारिश की संभावना भी जताई है। जो सामान्य से भी कम है।
फिर आम तौर पर एक जून तक भारत में मॉनसून आ जाता था। लेकिन इस बार मॉनसून में भी देरी हो रही है।
और फिर मौसम विभाग की माने तो अगले एक हफ्ते में मॉनसून केरल भी पहुंचेगा। और फिर पूरे देश में सक्रिय होते-होते महीना भर से ज्यादा समय भी लगेगा।
फिर ऐसे में जून-जुलाई तक गर्मी की धमक भी रहेगी। और मौसम विभाग ने जून-जुलाई में भी हीटवेव की चेतावनी भी जारी की है।
इतना ही नहीं मॉनसून में देरी और कम बारिश से खरीफ फसलों की बुआई पर भी असर पड़ेगा।
फिर ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से महंगाई भी बढ़ ही रही है।
और अब कमजोर मॉनसूनी बारिश से हालात और बिगड़ने के आसार भी बने हुए है। फिर कुल मिलाकर साल 2026 बहुत भारी पड़ने वाला है। फिर इसके लिए तैयारी पहले से ही करनी पड़ेगी।