धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। और फिर नीट पेपर लीक विवाद के बाद ही दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से प्रदर्शन भी शुरू हुआ था।
और फिर जिसमें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी हुई थी। फिर वहीं जब सरकार और सीजेपी के बीच चर्चा शुरू हुई थी।
तो फिर सूत्रों के मुताबिक सरकार की तरफ से बातचीत करने वाले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का ही प्रस्ताव दिया था।
लेकिन सीजेपी इसके लिए तैयार नहीं हुई थी। और फिर उनका स्पष्ट कहना था कि प्रधान के इस्तीफे के अलावा कोई और समझौता भी नहीं होगा।
और फिर दरअसल, CJP की मांगों को लेकर तीन दौर की बातचीत भी हुई थी। फिर जहां 25 जुलाई को तीसरे दौर की बातचीत शुरू होने से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने ही इस्तीफा दे दिया था।
लेकिन सूत्रों के मुताबिक ही जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव भी दिया था।
और फिर यह कहा गया था कि मंत्री हटाना या मंत्रालय बदलना पीएम का विशेषाधिकार है। हालांकि सीजेपी इसके लिए नहीं मानी।
फिर इसके पीछे यह भी कारण था कि सीजेपी के वार्ताकारों को लग रहा था कि इस्तीफे से कम पर अगर वे तैयार भी हुए थे प्रदर्शनकारियों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया भी शामिल होगी।
ये भी बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी है।
फिर जिसके बाद उन्होंने 26 जुलाई को ही अपना पदभार ग्रहण भी कर लिया था। और फिर कॉकरोज जनता पार्टी उनके इस्तीफे पर अड़ी भी हुई थी। फिर वहीं प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ दूसरी मांगों पर भी सहमति भी बन गई थी।