न्यूज़लिंक हिंदी। रामनगरी अयोध्या में होनेवाले दीपोत्सव से पहले सूबे की योगी सरकार की कैबिनेट बैठक गुरुवार को यहां श्रीरामकथा संग्राहलय के सभागार में होने जा रही है। अयोध्या में होने वाली इस कैबिनेट बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या को फिर बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। साथ ही 2024 से पहले वे अपने धार्मिक एजेंडे को भी धार देंगे। इससे पहले 2019 के कुंभ से पहले भी प्रयागराज में कैबिनेट बैठक हुई थी।
आज होने वाली कैबिनेट बैठक में योगी सरकार के करीब एक दर्जन मंत्री शामिल होंगे। साथ ही सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव भी बैठक में हिस्सा लेंगे। प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी व सूचना निदेशक भी मौजूद रहेंगे। बैठक के बाद राम कथा पार्क में कैबिनेट में पास प्रस्ताव को लेकर प्रेस ब्रीफिंग भी होगी। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन भी करेंगे। साथ ही निर्माणाधीन राम मंदिर का जायजा भी लेंगे।
इन प्रस्तावों पर लगेगी मुहर
अयोध्या में कैबिनेट बैठकके साथ ही योगी सरकार अपने धार्मिक एजेंडे को धार देगी। आज होने वाली कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगेगी। इस बैठक में अयोध्या तीर्थ विकास परिषद, देवीपाटन धाम तीर्थ विकास परिषद और मुजफ्फरनगर के शुक्रताल धाम तीर्थ विकास परिषद के गठन को हरी झंडी दी जा सकती है। इन तीनों ही विकास परिषद में मुख्यमंत्री अध्यक्ष बनाए जाएंगे। कैबिनेट में इन विधेयकों को पास करने के बाद नवंबर के आखिर में होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में इन्हें रखा जाएगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन का भी निर्णय इस बैठक में हो सकता है। आज की बैठक में पांच प्रस्ताव पर्यटन विभाग की तरफ से पेश हो सकते हैं, इसके अलावा मकर संक्रांति को प्रांतीय मेले का दर्जा भी मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी दिन सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
अयोध्या में राज्य कैबिनेट की यह पहली बैठक होगी। इससे पहले वर्ष 2019 में प्रयागराज में भी कैबिनेट की बैठक की गयी थी। उसी श्रृंखला में अयोध्या में रामलला की जन्मस्थली पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की जा रही है। अयोध्या में प्रदेश कैबिनेट की बैठक आयोजित करने के लिए 9 नवंबर की तिथि का चयन इस तथ्य को देखते हुए महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में इसी तारीख को अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाला फैसला सुनाया था।
इसके अलावा 9 नवंबर 1989 को विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली आधारशिला रखी थी। आमतौर पर उत्तर प्रदेश में कैबिनेट की।

