छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय ने स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के निलंबित आचार्य प्रो. मुकेश रंगा को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
फिर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने अनुशासनिक समिति की जांच रिपोर्ट, फिर उपलब्ध अभिलेखों और शिक्षक के स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया।
साथ ही आदेश के अनुसार, प्रो. रंगा पर नियुक्ति के समय पूर्व संस्थान का अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत न करने, पूर्व नियुक्ति के दौरान ही अयोग्यता के आधार पर बर्खास्त किया।
और फिर जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने, गंभीर कदाचार, घोर लापरवाही तथा फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने के आरोप भी सिद्ध पाए गए।
फिर विश्वविद्यालय के अनुसार 30 मार्च 2026 को गठित अनुशासनिक समिति ने मामले की जांच की। 20 अप्रैल को तीन आरोप तय भी किए गए।
फिर इसके बाद 23 मई को पूरक आरोपपत्र जारी कर अनुसूचित जाति के कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर प्रोफेसर पद प्राप्त करने का आरोप भी जोड़ा गया।
और फिर जांच के दौरान प्रो. रंगा को कई बार अभिलेख उपलब्ध कराने और अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया।
लेकिन विश्वविद्यालय का कहना है कि उन्होंने मांगे गए प्रमाण प्रस्तुत भी नहीं किए और न ही अनुशासनिक समिति के समक्ष उपस्थित भी हुए।
इसके अलावा विश्वविद्यालय ने सर्वोच्च न्यायालय के बीर सिंह बनाम दिल्ली जल बोर्ड के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति का आरक्षण उसी राज्य तक सीमित भी रहता है।
और फिर जहां संबंधित जाति अधिसूचित है। ऐसे में दूसरे राज्य में उस प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता।
इसके अलावा अनुशासनिक समिति ने 23 जून को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसे 25 जून की कार्यपरिषद बैठक में स्वीकार भी कर लिया गया।
फिर इसके बाद प्रो. रंगा को कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 कार्य दिवस का समय भी दिया गया।
फिर उनका जवाब 18 जुलाई की कार्यपरिषद बैठक में रखा गया, लेकिन परिषद ने इसे आरोपों का खंडन करने के लिए पर्याप्त भी नहीं माना।
फिर इसके बाद विश्वविद्यालय ने सेवा नियमावली के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश भी जारी कर दिया।
और कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने ये भी बताया कि प्रो. रंगा कई बार सुनवाई में उपस्थित भी नहीं हुए और न ही उन्हें जारी नोटिसों का जवाब दिया।
फिर इसके बाद कार्यपरिषद ने उपलब्ध जांच रिपोर्ट और अभिलेखों के आधार पर ही सेवा समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया।