कानपुर के हैलट अस्पताल में चार दिन पहले ही एक महिला में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
और फिर करीब एक महीने पहले त्वचा रोग विभाग में प्राइवेट पार्ट में गंभीर संक्रमण की शिकायत लेकर आई थी।
फिर उसकी जांच के बाद यह खुलासा हुआ। वहीं, महिला ने टैटू भी बनवाया था।और फिर ऐसे में डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि टैटू बनाते समय इस्तेमाल की गई दूषित और असंक्रमित सुई के कारण महिला इस जानलेवा वायरस की शिकार हुई होगी।
और फिर रोगी का इलाज कर रहे चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेतांक ने ये भी बताया कि अभी सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि महिला के टैटू बनवाने से एचआईवी हुआ है।
इसके साथ ही डॉ. श्वेतांक ने बताया कि महिला को एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी सेंटर भी भेजा गया।
हालांकि वहां से परिवार प्राइवेट केंद्र चला गया, जहां उसका इलाज जारी है। और फिर डॉक्टरों का कहना है।
कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है और रोगी को जीवन भर बेहद सतर्कता के साथ दवाएं लेनी पड़ती हैं।
इसके अलावा टैटू के शौकीनों को आगाह करते हुए डॉक्टरों ने ये भी बताया कि टैटू से सिर्फ एचआईवी ही नहीं बल्कि कई अन्य त्वचा रोग भी हो रहे हैं।
टैटू में इस्तेमाल होने वाली लाल और हरे रंग की स्याही के कारण कुछ लोगों को एलर्जी का खतरा भी होता है। फिर इसके चलते त्वचा पर दर्दनाक व खुजलीदार चकत्ते भी उभर आते हैं।
फिर आगे उन्होंने कहा कि हमेशा किसी अच्छी, साफ-सुथरी और प्रमाणित जगह से ही टैटू बनवाएं।
और टैटू आर्टिस्ट पर दबाव बनाएं कि वे आपके सामने ही सील पैक से नई और कीटाणुरहित सुई निकालें।
इसके अलावा टैटू बनवाने से पहले इस्तेमाल होने वाले रंगों और औजारों की स्वच्छता को लेकर पूरी तसल्ली कर लें। फिर आपकी छोटी सी लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है।